Sai aarti | Sai Baba Aarti PDF | साई बाबा आरती | शिरडी साई बाबा धूप आरती

Advertisement

यदि आप आसानी से संपूर्ण साईं बाबा आरती (sai baba aarti ) पढ़ना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख में संपूर्ण साईं बाबा आरती (sai baba aarti )पढ़ सकते हैं तथा इसकी पीडीएफ भी नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड (download) करके अपने फोन या कंप्यूटर में भी आसानी से पढ़ सकते हैं

साईं बाबा की आरती ( sai baba aarti ) करने के लिए अपने मन को शांत तथा अपने आपको साईं बाबा के चरणों में समर्पित करते हुए पढ़ना चाहिए जिससे कि भक्तों को धन-धान्य कीर्ति बुद्धि में बढ़ोतरी होती है और हमारा मन भी शांत हो जाता है

Advertisement

इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करके आप फ्री पुण्य के भागी बने और दूसरों को भी इसका लाभ लेने का मौका अवश्य दें शेयर करने के लिए आपको नीचे शेयर बटन मिल जाएगा

sai baba aarti  का परिचय:

sai baba aarti एक प्रमुख आराधना पद्धति है जो शिरडी साईं बाबा के समर्पण में सम्पन्न होती है। यह आरती उनके भक्तों द्वारा प्रतिदिन सम्पन्न की जाती है और इसे साईं बाबा की पूजा-अर्चना का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। साईं आरती भक्तों के द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है और इसे विभिन्न मंदिरों में सांप्रदायिक रूप से आयोजित किया जाता है।

sai baba aarti  भक्तों के द्वारा उनके प्रिय देवता साईं बाबा की महिमा, कृपा और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में गायी जाती है। साईं आरती के द्वारा भक्त अपने मन को शुद्ध करते हैं, आंतरिक स्थिति में शांति प्राप्त करते हैं और उनके मन को शांति और प्रकाश के साथ पूर्ण करते हैं।

sai baba aarti  एक महत्वपूर्ण पूजा पद्धति है जो श्रद्धालु भक्तों के द्वारा sai baba की पूजा-अर्चना का एक महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है। इसका महत्व निम्नलिखित प्रकारों में समाहित है:

  1. भक्ति और समर्पण का प्रतीक: sai baba aarti  के द्वारा भक्त अपनी भक्ति, समर्पण और आदर्शों को प्रकट करता है। यह आरती भक्त के आंतरिक और बाह्य समर्पण का प्रतीक होती है और उनकी अर्पण भावना को प्रकट करती है।
  2. मन को शुद्ध करने का अवसर: sai baba aarti  के द्वारा भक्त अपने मन को शुद्ध करते हैं। यह आरती भक्त के मन को आंतरिक शांति, प्रकाश और स्पष्टता से पूर्ण करती है।
  3. आनंद और सुख का स्रोत: साईं आरती के द्वारा भक्त अपने जीवन में आनंद और सुख का स्रोत प्राप्त करते हैं। इसके माध्यम से भक्त आंतरिक आनंद, समृद्धि और संतुष्टि का अनुभव करते हैं।
  4. आशीर्वाद की प्राप्ति: साईं आरती के द्वारा भक्त अपने प्रिय देवता साईं बाबा से आशीर्वाद मांगते हैं। इस आरती के माध्यम से भक्त भगवान के करुणा से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनके जीवन में खुशहाली और सफलता का स्थान प्राप्त करते हैं।
  5. आत्मिक और मानसिक शक्ति का संचार: साईं आरती के द्वारा भक्त अपनी आत्मिक और मानसिक शक्ति को जागृत करते हैं। यह आरती भक्त को आंतरिक स्थिति में शांति, उत्साह और सकारात्मकता का अनुभव कराती है।
  6. आध्यात्मिक संवाद का अवसर: साईं आरती के द्वारा भक्त अपने मन को भगवान साईं बाबा के समीप लाने और उनसे संवाद करने का अवसर प्राप्त करते हैं। इसके माध्यम से भक्त अपनी आराधना, प्रार्थना और मन की बातें भगवान के सामर्थ्य के सामक्ष रखते हैं।
  7. साईं आरती एक ऐसी पवित्र पूजा है जो भक्त के मन, शरीर और आत्मा को संयोग करके उन्हें भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति और आदर्शों के साथ भर देती है। यह आरती उन्हें आनंद, सुख, शांति और प्रकाश के साथ पूर्णता की अनुभूति दिलाती है।

Hanuman Chalisa in Hindi PDF Download | हनुमान चालीसा

bajrang baan lyrics in hindi PDF (बजरंग बाण पाठ)

गणेश आरती | Ganesh (Ganpati) Aarti PDF Hindi Download [ FREE ]

sai baba aarti PDF

sai baba aarti  के लिरिक्स (sai baba aarti Lyrics)

आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा। चरणरजातली । द्यावा दासा विसावा, भक्ता विसावा ।।

इस आरती में श्री साईबाबा की प्रशंसा की जाती है। आरती शुरू होती है जब वह कहते हैं, “आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा” जिसका अर्थ होता है “हे साईबाबा, जो सबको सुख देते हैं, उनके जीवन में सदा सौभाग्य हो”। यहां उनके चरणों की बात की गई है, “चरणरजातली” जो उनके पदार्थ होते हैं, और उनकी वंदना की जाती है। उनके द्वारा दी गई सेवा और भक्ति का वर्णन किया गया है, “द्यावा दासा विसावा, भक्ता विसावा” जिसका अर्थ होता है “वे देवताओं को और उनके भक्तों को खुश करते हैं, उनकी सेवा करते हैं”। इस आरती के माध्यम से भक्त उनकी पूजा और समर्पण करते हैं और साईबाबा की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

जाळुनियां अनंग। स्वस्वरूपी राहेदंग । मुमुक्षूजनां दावी । निज डोळा श्रीरंग ।।

इन पंक्तियों में जाळुनियां अनंग कहा गया है, जिसका अर्थ होता है “प्यार की ज्वाला” या “अमोघ आनंद”। साईबाबा को स्वस्वरूपी रूप में बताया गया है, जिसका अर्थ होता है “अपने ही स्वरूप में रहने वाले”। मुमुक्षूजनां दावी का अर्थ होता है “मोक्ष की प्रार्थना करने वालों को देना”। इसमें साईबाबा को निज डोळा श्रीरंग कहा गया है, जिसका अर्थ होता है “अपनी अनंत दृष्टि वाले श्रीरंग को”। इन पंक्तियों के माध्यम से साईबाबा की अद्वितीयता, आनंद और मुक्ति के प्रदान की बात की जाती है।

जयामनी जैसा भाव । तया तैसा अनुभव । दाविसी दयाघना । ऐसी तुझीही माव ।।

इन पंक्तियों में जयामनी जैसा भाव कहा गया है, जिसका अर्थ होता है “जैसा भाव हो उसी तरह का अनुभव हो”। यह बताता है कि जैसे भक्त अपने मन में श्री साईबाबा के प्रति भाव रखते हैं, वैसे ही उन्हें उनका अनुभव होता है। दाविसी दयाघना का अर्थ होता है “दया का सागर” या “कृपा का स्रोत”। यह बताता है कि साईबाबा की दया असीम है और उनकी कृपा सभी पर होती है। ऐसी तुझीही माव का अर्थ होता है “ऐसी ही हे माता” या “तुझी ही यही गुणवत्ता है”। इसके माध्यम से व्यक्त किया जाता है कि साईबाबा की माता की तरह अनुभूति करने की प्रार्थना की जाती है और उनकी गुणवत्ता की प्रशंसा की जाती है।

तुमचे नाम ध्याता । हरे संस्कृती व्यथा । अगाध तव करणी । मार्ग दाविसी अनाथा ।।

इन पंक्तियों में तुमचे नाम ध्याता कहा गया है, जिसका अर्थ होता है “तेरे नाम की ध्यान में रहना”। इसके माध्यम से व्यक्त किया जाता है कि भक्त श्री साईबाबा के नाम के ध्यान में रहते हैं। हरे संस्कृती व्यथा का अर्थ होता है “संसारिक दुःखों का अंत”। इसके माध्यम से व्यक्त किया जाता है कि साईबाबा की शक्ति से संसारिक दुःखों का अंत होता है। अगाध तव करणी का अर्थ होता है “तेरी कृपा के अगाध कार्य”। यह बताता है कि साईबाबा की करुणा असीम है और उनके कार्य अद्वितीय हैं। मार्ग दाविसी अनाथा का अर्थ होता है “मार्गदर्शन करने वालों को अनाथ बनाना”। इसके माध्यम से व्यक्त किया जाता है कि साईबाबा सबके मार्गदर्शक हैं और उनके आश्रय से सभी अनाथ हो जाते हैं।

कलियुगी अवतार । सगुण परब्रह्मः साचार । अवतीर्ण झालासे । स्वामी दत्त दिगंबर ।।

कलियुगी अवतार का अर्थ होता है “कलियुग में अवतार लेने वाले”। इसके माध्यम से व्यक्त किया जाता है कि साईबाबा कलियुग में अवतार लेने वाले हैं। सगुण परब्रह्मः साचार का अर्थ होता है “गुणों से परे ब्रह्मा की अस्तित्व की प्रतिष्ठा”। यह बताता है कि साईबाबा अद्वैत ब्रह्मा के साथ साकार रूप में विद्यमान हैं। अवतीर्ण झालासे का अर्थ होता है “उन्होंने अवतरित हो जाया है”। यह व्यक्त करता है कि स्वामी साईबाबा अवतरित हो चुके हैं। स्वामी दत्त दिगंबर का अर्थ होता है “स्वामी दत्त दिगंबर”। यह बताता है कि साईबाबा दत्तात्रेय के स्वरूप में हैं, जिन्हें दिगंबर नाम से भी जाना जाता है।

आठा दिवसा गुरुवारी । भक्त करिती वारी । प्रभुपद पहावया । भवभय निवारी ।।


आठा दिवसा गुरुवारी का अर्थ होता है “अठवणीसी गुरुवार को”। यह बताता है कि साईबाबा की पूजा और आराधना अठवणीसी गुरुवार को की जाती है। भक्त करिती वारी का अर्थ होता है “भक्तों द्वारा प्रदर्शन किया जाने वाला समर्पण”। यह दर्शाता है कि भक्तों द्वारा अपना समर्पण साईबाबा के लिए किया जाता है। प्रभुपद पहावया का अर्थ होता है “प्रभु के पादों को देखा जाता है”। यह दिखाता है कि साईबाबा के पादों का दर्शन किया जाता है और उनकी सेवा की जाती है। भवभय निवारी का अर्थ होता है “भवसागर से भय का निवारण”। यह दर्शाता है कि साईबाबा भक्तों को संसारिक भय से मुक्त करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं।

माझा निजद्रव्यठेवा । तव चरणरज सेवा । मागणे हेचि आता । तुम्हा देवाधिदेवा ।।

माझा निजद्रव्यठेवा का अर्थ होता है “मेरा अपना वास्तविक स्वरूप”। यह बताता है कि साईबाबा मेरा अपना स्वरूप है और मैं उनका अपना हूँ। तव चरणरज सेवा का अर्थ होता है “तेरे पादों की सेवा”। यह दर्शाता है कि मैं साईबाबा के पादों की सेवा करता हूँ। मागणे हेचि आता का अर्थ होता है “यही मेरी मांग है”। यह दिखाता है कि मेरी यही आशा है कि साईबाबा मेरी मांग सुनें। तुम्हा देवाधिदेवा का अर्थ होता है “तुम्हारे देवताओं के देव”। यह दर्शाता है कि साईबाबा भगवान की भी भगवान हैं और उनके समक्ष मेरी प्रार्थना होती है।

इच्छित दिन चातक। निर्मल तोय निजसुख । पाजावे माधवा या । सांभाळ आपुली भाक ।।

इच्छित दिन चातक का अर्थ होता है “प्रतीक्षामय दिन की चाह”। यह दर्शाता है कि भक्त अपनी प्रतीक्षा के दिन को चाहता है, अर्थात साईबाबा के दर्शन के दिन को इच्छित करता है। निर्मल तोय निजसुख का अर्थ होता है “पवित्र जल से अपने सुख को धोना”। यह दर्शाता है कि भक्त अपने आत्मिक सुख को पवित्र जल से धोना चाहता है, अर्थात साईबाबा के द्वारा अपनी आत्मिक सुख को शुद्ध करना चाहता है। पाजावे माधवा या का अर्थ होता है “माधवा या बांधने”। यह दर्शाता है कि साईबाबा को पाजावे, अर्थात माधवा या बांधने की प्रार्थना की जाती है। सांभाळ आपुली भाक का अर्थ होता है “अपनी चरणांची संरक्षण करो”। यह दर्शाता है कि भक्त अपनी प्रेमभावना के साथ साईबाबा की चरणांची संरक्षण करता है और उन्हें संभालता है।

आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा। चरणरजातली । द्यावा दासा विसावा, भक्ता विसावा ।।

आरती साईबाबा का मतलब होता है “साईबाबा की आरती”। इसके संदर्भ में “सौख्यदातार जीवा” का अर्थ होता है “सभी जीवों को सुखदाता”। यह दर्शाता है कि साईबाबा सभी जीवों को सुख प्रदान करते हैं। “चरणरजातली” का अर्थ होता है “उनके पादों में”। यह दर्शाता है कि साईबाबा के पादों में हम आरती चढ़ाते हैं और उन्हें समर्पित करते हैं। “द्यावा दासा विसावा, भक्ता विसावा” का अर्थ होता है “आपका दास बनता हूँ, भक्त बनता हूँ”। यह दर्शाता है कि हम सभी साईबाबा के दास बनकर उनकी भक्ति में लीन होते हैं।

प्रार्थना | Prarthna | Karcharan Kritam

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं

वा श्रवणनयनजं वा मानसं वाsपराधम्

विदितमविदितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व

जय जय करुणाब्धे श्रीप्रभो साईनाथ

यह पंक्तियाँ साईनाथ भगवान की महिमा को व्यक्त करती हैं। “करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा” का अर्थ होता है “चाहे वो कर्म हो या वचनों से उत्पन्न हो या देह से उत्पन्न हो”। यह दर्शाता है कि हम अपने कर्मों, वचनों और शरीर के माध्यम से साईनाथ की सेवा करते हैं। “श्रवणनयनजं वा मानसं वाsपराधम्” का अर्थ होता है “या तो सुनने और देखने के माध्यम से हुए पापों को या मानसिक रूप से हुए पापों को”। यह कहता है कि हम अपने जाने अनजाने किए गए पापों को क्षमा करें। “विदितमविदितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व” का अर्थ होता है “चाहे जाने या न जाने, सब कुछ क्षमा करो”। यह कहता है कि हम सभी को अपनी कृपा से सर्वत्र क्षमा करें। “जय जय करुणाब्धे श्रीप्रभो साईनाथ” का अर्थ होता है “हे करुणा के सागर, हे श्रीप्रभो साईनाथ, हे जय हो, जय हो।

।। श्री सच्चिदानंद सदगुरु साईनाथ महाराज की जय ।।

Apple partner Foxconn to invest $500 million in India’s Telangana

साई बाबा आरती पीडीएफ (PDF) कहां मिलेगा?

साई बाबा आरती PDF आप ऑनलाइन खोजकर साई बाबा के समर्पित हमारी वेबसाइट या आध्यात्मिक संसाधनों पर उपलब्ध कर सकते हैं।

साई आरती का महत्व क्या है?

साई आरती का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि इसे मान्यता है कि यह वातावरण को शुद्ध करती है, भक्तों की आत्मा को उन्नत करती है और साई बाबा के साथ एक दैवी संबंध स्थापित करती है।

क्या मैं घर पर साई आरती का जाप कर सकता हूँ?

हां, आप घर पर प साई आरती का जाप कर सकते हैं। आप साई बाबा की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर आरती का पाठ कर सकते हैं और अपने घर में आरती के लिए स्पेशल स्थान निर्धारित कर सकते हैं। यह आपको साई बाबा के समृद्धि, सौभाग्य और शांति के आशीर्वाद से युक्त करेगा।

Q: साई आरती कितनी बार करनी चाहिए?

साई आरती को आप किसी भी संख्या में कर सकते हैं। आमतौर पर, लोग सुबह और शाम में एक-एक बार साई आरती का पाठ करते हैं। आप अपनी व्यक्तिगत प्राथना और साधना के अनुसार आरती की विधि और संख्या निर्धारित कर सकते हैं।

साई आरती के लाभ क्या हैं?

साई आरती के द्वारा आप साई बाबा के आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं, आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है, शांति और सुख की वातावरण बनती है और अपने जीवन में संतोष और शुभ कार्यों की प्रगति होती है। यह आपको आध्यात्मिक अनुभव और ध्यान में स्थिरता प्रदान करता है।

Advertisement

Leave a comment